घेवर एक अनोखी मिठाई

 


सदा घेवर 

घेवर राजस्थान की एक अनोखी मिठाई है। यह मुख्य रूप से श्रावण मास, गंगोर, तीज और रक्षा बंधन के त्योहारों से जुड़ी हुई  है। यह मैदा, घी और चीनी से बनती है और इसका आकार डिस्क या मधुमक्खी के छत्ते (हनीकॉम्ब) जैसा जालीदार होता है। इंग्लिश मे इसे हनीकॉम्ब डिज़र्ट के नाम से जाना जाता है। किसी समय राज शाही भोजन का हिस्सा रही यह मिठाई, कब आम जीवन को हिस्सा हो गई- पता ही नहीं चला। 

घेवर मूल रूप से एक पारंपरिक राजस्थानी मिठाई है। इसे संस्कृत में सधिद्रक भी कहते है। यह भगवान कृष्ण को लगने वाले 56 व्यंजनों मे भी शामिल है। यह गोलाकार आकार मे 4 इंच से लेकर 18 इंच तक हो सकती है। राजस्थान मे इस मिठाई के इससे बड़े रूप भी देखने को मिल सकते है।   

आज के समय में इसके स्वाद और बनावट के आधार पर इसे कई प्रकार से बनाया जाता है। लोगों के बीच घेवर के कुछ बेहद लोकप्रिय स्वाद इस प्रकार है - 

सादा घेवर : यह घेवर का सबसे पारंपरिक और बुनियादी रूप है। इसमें मैदा, घी और दूध के घोल से बर्फ की सहायता से जालीदार घेवर बनाकर चाशनी (शुगर सिरप) में डुबोया जाता है और ऊपर से इलायची और पिस्ता लगाया जाता है। घेवर का सबसे साधारण रूप यह ही है ।  

मावा घेवर 
मलाई घेवर: सादे घेवर के ऊपर गाढ़ी मलाई या रबड़ी की एक मोटी परत लगाई जाती है, जिससे यह घेवर देखने मे बहुत खूबसूरत तो लगता ही है साथ मे खाने में बहुत ही स्वादिष्ट और क्रीमी होता है। 

मावा या खोया घेवर: इसमें सादा घेवर के ऊपर मावा (खोया) और मेवों की सजावट की जाती है, जिससे इसका स्वाद काफी बढ़िया हो जाता है। यह भी देखने मे जितना सुंदर लगता है वैसे ही स्वादिष्ट इसका स्वाद होता है।  

ड्राई फ्रूट घेवर: सादे या मलाई घेवर के ऊपर काजू, बादाम, पिस्ता और केसर जैसे सूखे मेवे डाले जाते हैं। मेवो से पूरी तरह से सजे घेवर को ड्राई फ्रूट घेवर कहते है।   

चॉकलेट घेवर: यह घेवर का एक आधुनिक रूप है, इसे चॉकलेट के शौकीनों के लिए कोको पाउडर का इस्तेमाल करके या चॉकलेट सिरप की कोटिंग करके बनाया जाता है। इसे आप एक तरह से देशी चॉकलेट केक भी कह सकते है । 

घेवर कई रूपों मे आज मिलता है परंतु उसके तीन पारंपरिक रूप का स्वाद वास्तव मे अनोखा है, जो है सादा घेवर, मलाई घेवर और  मावा या खोया घेवर । 



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