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| चावल की खीर |
यह एक ऐसा व्यंजन है, जिसे भोग-प्रसाद के रूप मे घर पर ही बनाया जाता है। दूध, चावल, इलाइची , गुड़ व चीनी और विभिन्न प्रकार की मेवा इसकी मुख्य सामग्री है ।
इस व्यंजन को जहां उत्तर भारत में खीर के नाम से जाना जाता है, वहीं दक्षिण भारत मे इस पायसम कहते हैं ।
खीर के प्रकार
खीर कई प्रकार से बनाया जाने वाला व्यंजन हैं - इसमे प्रमुख रूप से बनाई जाने वाली खीर है - चावल और दूध की खीर, समा के चावल की खीर, जवे की खीर, फिरनी, पायसम आदि।
1- चावल की खीर - चावल, चीनी और दूध से तैयार यह पकवान स्वाद मे बहुत ही लजवाब होता है । धीमी-धीमी आँच पर पक कर तैयार की गई खीर मिटाई का एक अलग ही रूप है । इसमे आप इलाइची और विभिन्न प्रकार की मेवों का प्रयोग कर सकते हैं ।
2- मेवा की खीर - मेवा की खीर विभिन्न प्रकार की मेवा, चीनी और दूध से तैयार एक विशेष प्रकार की खीर होती है, जिसका सेवन आप व्रत आदि में भी कर सकते हैं । पाँच तरह के मेवों से तैयार इस व्यंजन को पंच मेवा के नाम से भी जाना जाता है ।
3-समा के चावल की खीर : समा के चावल, जिन्हें सामक के चावल या बार्नयार्ड मिलेट भी कहा जाता है, एक प्रकार का अनाज है जो उपवास के दौरान खाया जाता है। समा के चावल कैल्शियम से भरपूर होते हैं और दिन भर भूखा रहने के बाद ये पेट के लिए हल्के और पोषण से भरपूर होते हैं। इससे तैयार खीर स्वादिष्ट होने के साथ सेहत के लिए लाभप्रद भी होती है ।
4- साबूदाने की खीर : साबूदाने की खीर भी व्रत के व्यंजन मे से एक है । यह ऊर्जा का एक अच्छा स्रोत है। यह गर्मी के दिनों में शरीर को ठंडा रखने में भी मदद करता है।
5- जवे की खीर - मीठे जवे, जिसे सेमिया पायसम या सेवई खीर के नाम से भी जाना जाता है, भुनी हुई सेवई, दूध और चीनी से बनाई जाने वाली एक मीठी भारतीय मिठाई है। यह मलाईदार सेवइयां खीर एक उत्तर भारतीय मिठाई है ।
6- फिरनी : फिरनी एक प्रकार की मीठी खीर की तरह बनाई जाने वाली पंजाबी शैली का मीठा व्यंजन है। जहां सामान्य खीर में साबुत चावल का उपयोग होता है, लेकिन फिरनी के लिए चावलों को कुछ देर भिगोकर हल्का दरदरा पीस लिया जाता है। इसे दूध में तब तक पकाया जाता है जब तक कि यह गाढ़ी मलाईदार स्थिरता में न आ जाए।
शरद पूर्णिमा और खीर का महत्त्व
शरद ऋतु मे शरद पूर्णिमा को खीर खाने का धार्मिक महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन चंद्रदेव 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृत वर्षा करते हैं, यही वजह है कि शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में खीर रखने से उसमें अमृत घुल जाता है।
इसके अलावा शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी के प्राकट्योत्सव के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन धन के देवी मां लच्मी समुद्र मंथन से उत्पन्न हुई थीं। इसके साथ ही द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी में महारास किया था और इससे प्रसन्न होकर चंद्रमा ने अमृत वर्षा की थी।
पाल पायसम खीर का दक्षिण भारतीय रूप है । तमिल मे पाल का अर्थ दूध होता है
बंगाली मे खेर व्यंजन को ' पयेश ' कहा जाता है और इसमें बासमती के स्थान पर गोबिंदो भोग का उपयोग किया जाता है - जो कि छोटे दाने वाला, सुगंधित, चिपचिपा चावल होता है जिसका स्वाद मीठा और मक्खन जैसा होता है।

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